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इंकलाब जिंदाबाद कौन करेगा?

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इंकलाब जिंदाबाद शब्द सुनकर किसी के मन में एकदम से देशभक्ति जाग सकती है और उसे तुरंत यह एहसास होगा कि काश वह व्यक्ति सीमा पर होता और पाकिस्तान को गोलियों से भून देता ,ज्यादातर लोग यही सोचेंगे पर इसका एक मतलब औऱ है जो बुद्धिजीवियों और पढ़े लिखे सीमित लोगो तक सीमित है जिस इंकलाब का ताल्लुक गरीबी ,बेरोजगारी,भ्र्ष्टाचार,कुपोषण, विखंडता के खिलाफ इंकलाब जिंदाबाद करना है पर इस समय ऐसे लोगों का अकाल है या वही स्वार्थी है और अगर है भी तो उन्हें कौन सुन समझ पा रहा है?
भगत सिंह का नाम लेते ही 80% लोग यहीं कहेंगे कि आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती औऱ हमें इससे आज़ादी चाहिए, ऐसे कितने लोग होंगे जिन्होंने भगत सिंह को बखूबी जाना समझा होगा,5 करोड़,10 करोड़,20 करोड़ बस इतने ही होंगे।
भगत सिंह का कहना था कि व्यक्तियों को कुचल कर उनके विचारों को नही मारा जा सकता ,आज लोग विचारो की सवंत्रता के लिए सड़क पर है।
भगत सिंह का यह भी कहना था कि व्यक्तियों को समझाना की धर्म व्यक्तिगत मामला है इसका राजनीती करण नही होना चाहिए औऱ व्यक्तियों को ऐसे संगठन से दूर रहना चाहिए जो समाज को बाँट ते है लेकिन आज लोग विचारो की सवंत्रता मांगन…