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साड्डा हक एथ्थे रख!!

साड्डाहकएथ्थेरख एक बार की बात है ,रविवार का दिन था,सुबह का वक्त था,तेज पानी व् घने बादलो के बीच मेरी सुबह हुई तो बहार निकलकर देखा तो पास के विद्यालय के बहार हजारों युवाओं की भीड़ थी तथा ऐसी ही भीड़ पुरे शहर के विद्यालयों के बहार थी,वहां खड़े युवा सेण्टर के बहार चस्पा लिस्ट को बार-बार अपने एडमिट कार्ड के अनुरूप देख रहे थे,दर्हसल उस दिन परीक्षा होने वाली थी संघ लोक सेवा आयोग के सिविल सर्विसेज की| अभी परीक्षा में काफी समय था,एक लेखक होने के नायते मैं उनसे बेरोजगारी पर बात करने निकला,उस सेण्टर पर खड़े युवा काफी दूर-दराज व् लम्बा रास्ता तय करके वहां पहुंचे थे,उनसे बात करना मेरे लिए काफी अनुभवपूर्ण रहा,उसी अनुभव को आपसे शेयर कर रहा हूँ| “बेरोजगारी का शब्द सुनते ही प्रत्येक व्यक्ति के दिलो-दिमाग में भारत का नाम पहले आता है,इसका यह मतलब नही है की बाकी देश में बेरोजगारी नही होती,होती है पर उस देश के निति-निर्माता इसे गंभीरता से लेते हुए इसकी जड़ तक पहुंचकर इसका समाधान खोज लेते है पर भारत में यह गंभीरता से नही लिया गया इसका दुष्परिणाम यह हुआ बेरोजगारी की दर लगातार नईं ऊंचाई को छूती जा रही है,सन 2001 मे…