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71th Independence Day of India

Happy 71th Independence Day of India, on this occasion I tribute to all freedom fighters , Soldiers,Farmers, journalists  workers, and those 2 crore people who died with hunger from 1857-1943, national leader who paid thier life for getting freedom from the British.
What we have achieved in these 70 years, we have achieved everything, transparent govt, good humanism, national intregraty , per capita income from 18₹ to 1.3 lakh (2017)/month , but inequality paina us , over 70% of indian wealth is hand in only 1% people and 72 crore of indians survive in salary of 30 ₹ per day.
Over 2 crore childs die in a year due malnutritution. 1 lakh peoples die in a year due to road accident.
Castesim is very long sin and also present in people minds yet. Communiliam and castesim are a bad stone in growing a country .
People are fighting to each other about religion , caste, and in the name of worship.
Womens have not achieved mentally freedom yet , they are bound by caste and explotion culture, p…

इंकलाब जिंदाबाद कौन करेगा?

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इंकलाब जिंदाबाद शब्द सुनकर किसी के मन में एकदम से देशभक्ति जाग सकती है और उसे तुरंत यह एहसास होगा कि काश वह व्यक्ति सीमा पर होता और पाकिस्तान को गोलियों से भून देता ,ज्यादातर लोग यही सोचेंगे पर इसका एक मतलब औऱ है जो बुद्धिजीवियों और पढ़े लिखे सीमित लोगो तक सीमित है जिस इंकलाब का ताल्लुक गरीबी ,बेरोजगारी,भ्र्ष्टाचार,कुपोषण, विखंडता के खिलाफ इंकलाब जिंदाबाद करना है पर इस समय ऐसे लोगों का अकाल है या वही स्वार्थी है और अगर है भी तो उन्हें कौन सुन समझ पा रहा है?
भगत सिंह का नाम लेते ही 80% लोग यहीं कहेंगे कि आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती औऱ हमें इससे आज़ादी चाहिए, ऐसे कितने लोग होंगे जिन्होंने भगत सिंह को बखूबी जाना समझा होगा,5 करोड़,10 करोड़,20 करोड़ बस इतने ही होंगे।
भगत सिंह का कहना था कि व्यक्तियों को कुचल कर उनके विचारों को नही मारा जा सकता ,आज लोग विचारो की सवंत्रता के लिए सड़क पर है।
भगत सिंह का यह भी कहना था कि व्यक्तियों को समझाना की धर्म व्यक्तिगत मामला है इसका राजनीती करण नही होना चाहिए औऱ व्यक्तियों को ऐसे संगठन से दूर रहना चाहिए जो समाज को बाँट ते है लेकिन आज लोग विचारो की सवंत्रता मांगन…

Interference of Pakistan in Kashmir issues

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The topic is very tuff to define in the few words,we have to understand it's past in order to present.
On 15 Aug 1947 we got freedom from the british colonialism and the same time we had divided between two countries India and Pakistan and the state Jammu and Kashmir was independent and their king was Maharaj Hari Singh ,was very known and famous in the state.after division of india and Pakistan,on 20 Oct 1947 pakistan's supported Azad Kashmir Sena attacked on state to snatch the kashmir part then Raja Hari Singh begged india's help to get rid from terrorist. India helped by sending troops therefore Hari Singh decided J&K to merge with india and on 26th Oct 1947 there had been signed a Merge letter between Nehru and Hari Singh that J&K will be merged with india and india will be active in srate for only Defence,foreign affair and vigilance subjects. After this section 370 was included in constitution of india and finally state made their own constitution on 26th J…

Climate Change

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On the earth we are depended upon environment and eco-system and environment and ecosystem is depended on us.
We are directly/indirectly responsible for any activity in nature/ecosystem,for us it is important to keep safe our environment and ecosystem.
Nowadays we feel unseasonable activity like summer in winter ,winter in summer,rainy days in winter even and very warm sunlight.
These all are example of Climate change and global warming.
Global warming is very reasonable activity for Climate change,since starting of 19th century we are noticing that temperature of earth is increasing day by day and global warming has been already increased.
It all affect badly on atmosphere,environment,biodiversity. It affects atmosphere where different gasses are present in balanced quantity for keeping stability of nature .
Now the question is what is to say Climate change?
According to scientist the earth is older than 4.6billion year and process of Climate change has been happening since earth…

Union Budget 2017-18(India)

Following are the highlights of Mr. Jaitley's Budget speech: DemonetisationDemonetisation is expected to have a transient impact on the economy.It will have a great impact on the economy and lives of people .Demonetisation is a bold and decisive measure that will lead to higher GDP growth.The effects of demonetisation will not spillover to the next fiscal. Agriculture sectorSowing farmers should feel secure against natural calamities.A sum of Rs. 10 lakh crore is allocated as credit to farmers, with 60 days interest waiver.NABARD fund will be increased to Rs. 40,000 crore. Government will set up mini labs in Krishi Vigyan Kendras for soil testing.A dedicated micro irrigation fund will be set up for NABARD with Rs 5,000 crore initial corpus.Irrigation corpus increased from Rs 20,000 crore to Rs 40,000 crore.Dairy processing infrastructure fund wlll be initially created with a corpus of Rs. 2000 crore.Issuance of soil cards has gained momentum.A model law on contract farming will b…

मुस्लमान

एक समय था जब हमारी आजादी में मुसलमानो का भी समतुल्य योगदान  था,1857 के सिपाही विद्रोह से लेकर 1916 तक मुसलमानों का योगदान अतुलनीय रहा वे कम शिक्षा और कम संसाधन के बाबजूद प्रबल राष्ट्रवाद की अवधारणा के साथ खड़े रहे बाद में यानि 1857 के विद्रोह के बाद जिसमे सबसे ज्यादा बलिदान मुसलमानों ने दिया था,अंग्रेज अब यह बात समझ गए की 1857 जैसा विद्रोह दोबारा रोकने के लिए उन्हें साम्प्रदायिकता का सहारा लेना पड़ेगा,इसीलिए उन्होंने बांटो और राज करो की निति अपनायी और उच्च जातियों के हिन्दुओ को शिक्षा और रोजगार में अवसर अधिक देना शुरू कर दिया जिससे धीरे-धीरे मुसलमानों को अपना पिछड़ापन दिखने लगा और उनकी शिक्षा के लिए सन 1875 में सर सय्यद अहमद खान ने ‘अलीगढ मुस्लिम विद्यालय’ की स्थापना की और उनको अपने अधिकार और हितो को लेकर सचेत किया तभी से कांग्रेस मुस्लिमो के पक्ष में झुकने लगी और 1887 के कांग्रेस के बंबई अधिवेसन में बदरुद्दीन तैय्यब कांग्रेस के पहले मुस्लिम अध्यक्ष बने,वहीँ धीरे-धीरे अंग्रेज मुस्लिमो को हीन दशा में लाते गए और एक वक़्त वो आया जब मुस्लमान आर्थिक/राजनैतिक/सामाजिक रूप से अति पिछड़ गए और उनको …

आरक्षण - आर्थिक बनाम जातिगत

जी हाँ हो सकता है की आरक्षण का नाम सुनते ही कईयों के मन में घ्रणा उत्पन्न हो जाये और उनके मन में प्रबल राष्ट्रवाद उत्पन्न हो जाये,हो सकता है कईयों को कांग्रेस की धर्म-निरपेक्षता की निति का खयाल आ जाये,लेकिन आरक्षण को भी कई बुद्धिजीवियों ने समाज की आवश्यकता बताया है और कई बुद्धिजीवियों ने इसे सामाजिक टकराव का कारण बताया है और इसे सामाजिक न्याय का कलंक बताया है,आरक्षण शब्द सुनकर ज्यादातर लोगों को अनुसूचित जाति/जनजाति की याद आती होगी,जिसे गाँधी जी ने 1932 में हरिजन(हरि के जन) की संज्ञा दी थी| कुछ महान बुद्धिजीवी इसे जातिवाद कहतें है जो अभी तक मौजूद है,लेकिन यदि जाति ही न होती तो आरक्षण भी नहीं होता यह बात भी सत्य है,लेकिन जातिवाद को कोसने वाली विचारधारा रखने वाले महान व्यक्तियों को इस बात पर सहमत होना चाहिए की जब आरक्षण नही था,यानि 1000-1932 तक तब क्या इन्होने जाति व्यवस्था का विरोध किया था| जब दलितों को शुद्र की संज्ञा दी जाति थी और शिक्षा/रोजगार/राजनैतिक/सामाजिक अधिकार इनसे उछूते थे और इन्हें समाज में अछूत कहा जाता था| और आज जब इनका सामाजिक/राजनैतिक उभार हुआ है तो अब यह जातिवाद बन गया…